कुछ हाथ से उसके फिसल गया,
वह पलक झपक कर निकल गया,
फिर लाश बिछ गयी लाखों की,
सब पलक झपक कर बदल गया,
सब रिश्ते राख़ में बदल गए, इन्सान का दिल भी बदल गया,
मै पूछ पूछ कर हर गया,
क्यों मेरा भारत बदल गया.
Friday, May 8, 2009
क्यों मेरा भारत बदल गया.
Posted by Anand Vaishnav at 4:48 AM
Labels: Hindi Orkut Scraps
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